Wednesday, June 14, 2006

प्रखर

कुछ ख्वाब हैं मेरे जिनके लिये मैं ज़िंदा हूं...
इक देस है मेरा जिसके लिये मैं ज़िंदा हूं...
हर दिन लगता है, आज जीने के लिये ज़िंदा हूं...
हर रात लगता है... कल का सूरज आ रहा है मेरे लिये
शायद उस सूरज के लिये ज़िंदा हूं...



कुछ दोस्त हैं मेरे जिनके लिये मैं ज़िंदा हूं...
या शायद वो ही मेरी ज़िंदगी हैं...
प्रखर नाम है मेरा...
लगता है इस नाम को ज़िंदा रखने के लिये मैं ज़िंदा हूं...
कुछ ख्वाब हैं मेरे.......