Wednesday, July 19, 2006

चांद-सितारे और वो....



जगमगाते हैं तारे उनके नूर से...
उनके नूर से रोशन है ये रात...
और वो कह्ते हैं तारे नहीं करते उनसे बात
तारों की नहीं है खता ...
बेज़ुबान कहना तो बहुत कुछ हैं चाह्ते...
पर बस झिलमिला के ही हैं रह जाते



हर रात देखुं चांद को, इक चेहरा नज़र आता है
इक चेहरे मे हर बार चांद सा नूर नज़र आता है...
आंखें हैं कि दोनो मे फ़रक ही नहीं जानती
हर सुरज के निकलते,वो चांद याद सा आता है

4 comments:

Anonymous said...

Super color scheme, I like it! Keep up the good work. Thanks for sharing this wonderful site with us.
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Anonymous said...

I find some information here.

Anonymous said...

तूफ़ानों का रुख मोड्ने का दावा नहीं करते ....
पर साहिल पर बैठ कर हम प्यार नहीं करते
MASTO poetry jackoda..ek request hai..thoda lamba poem likho na..mein pucca se yahaan pe hindi elocution mein sunaunga..feeling ayega to mast effect ayega...aur agar meri elocution se darr lagta hai to keep writing anyway!
Tejvansh

Voice said...

are yaar bahut romantic peoms likh rahahai

inspiration kaha se mil rahi hai tumhe :P

good one