Thursday, July 03, 2008

पहला मोड

I wrote this one some eight years ago while returning home after my 12th board .... found it yesterday among my stuff.
I am little proud (strong hindi vocabulary) and little embarrassed (seems immature now)of it.
Damn its too long...



समय का पहिया घूम गया
नवजीवन मुझमे झूम गया
ज़िन्दगी के पहले मोड पर मुडा हूं
स्वर्णिम काल विदा कर बढा हूं

उसे जाना था वो चला गया
मुझे तडपता बिलखता छोड गया
जब था तब महत्व नहीं जाना
जाने के बाद कैसा पछ्ताना

अब सारी यादें जो मेरी अपनी हैं
जीवन की अनमोल निधी हैं
निःसन्देह मेरा साथ नहीं छोडेंगी
हार्दिक भावनओं को स्वच्छ करेंगी
मानसिक द्र्ढता और संबल देंगी

पर यादों के सहारे नहीं जीना है
सपना है तो पूरा भी करना है
कर्म करते जाना यही कहता है मेरा मन
कर्मण्यवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन

आज इस मोड पर

जब हमारी रेलगाडी रेलें बदल रही है
नए रास्तों की ओर प्रशस्त कर रही है
अज्ञात सत्यों की ओर ढकेल रही है

तब हे प्रभु

पीछे हतने वाले कदम हमारे न हो
जीवन किसी के सहारे न हो
इरादे हमेशा नेक हो
चाहे कांटे अनेक हो

इन कांटो के बिना गुलाब भी क्या जिया
कांते ही तो हैं गुलाबों की प्रिया
गुलाब की महक सभी के मन में हो
खुशहाली सदा ही इस चमन में हो

ये चमन, मेरा देश, मेरा हिंदोस्तान
इसी पर हो आने वाला जीवन कुर्बान
ऎ मेरे वतन तुझे मेरा सलाम
- जय हिंद !