Friday, April 23, 2010

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तितलियों के पंखों से निकले रंग
लगे हैं मेरी हथेली पर
महुए की महक में लगता है
होली मैं भी खेला हूं ज़रा ज़रा

घडी के घूमते कांटों की आवाज़
गूंज रही है इस घर में
उस खुली खिडकी से आती ठंडी हवा
कर रही है बेचैन मुझे
कभी इस करवट कभी उस करवट
सोया हूं मैं ज़रा ज़रा

बारिश जो हुई कल रात
रिस रही है दिल में आज
एक तस्वीर को लगा सीने से
भीगा हूं मैं भी ज़रा ज़रा...
... ज़रा ज़रा
तेरे इंतज़ार में
... ज़रा ज़रा
तेरे प्यार में

8 comments:

nea said...

beautiful... just awesome..

Voice said...

aise to foto kharab ho jayegi na :P

Prakhar said...

@ Neha

Thanks dear :)

@ Bhav

Arre photo frame me hai re photo :P

shahid said...

i 'likes' it too much :)

esp the last para ....super

joie de vivre said...

mujhe bhi kuch yaad aa gaya yeh pad kar ZARA ZARA..
sundar hai

Divya said...

nice one :)

Sparkling said...

Zara zara, zara, zara...
Beautiful!!! Makes me want to look for my 'tasveer' as well ;)

P.S: How are you?

commited to life said...

hi..
u hav an award on my blog