Thursday, February 09, 2012

जूनूनी

अजी कमाल है ज़िन्दगी
कुछ बावरी सी ज़िन्दगी
कुछ मलंग सी ज़िन्दगी

ढलते सूरज के साथ
करे सुबह क इन्तज़ार
ख्वाब बुनती ज़िन्दगी

गिरते आसमां के पार
ढूंढे एक नया आकाश
नादान सी ज़िन्दगी

आज तक जो चली अकेली
अब चाहे एक हमसफ़र क प्यार
अधूरी सी ज़िन्दगी

थक कर, रुक कर, गिर कर, आज इस हार के बाद
कल फिर जीने को बेकरार
ये जूनूनी ज़िन्दगी

1 comment:

Voice said...

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