Tuesday, December 31, 2013

क़लम

ये नीली स्याही वाली क़लम
आज कुछ लिखना चाहती है

खूब सारे अल्फ़ाज़ हैं इस दिल में
उन सब को पिरो के, एक खूबसूरत ग़ज़ल लिखना चाहती है
ये नीली स्याही वाली क़लम
आज कुछ...

आज ये एक कहानी भी लिखना चाहती है
कुछ अनसुने किस्से बयाँ करना चाहती है
चन्द संजीदा किरदारो को उभारना चाहती है
ज़िंदगियो पर अपना निशाँ जो छोड़े
एसी यादगार एक कहानी लिखना चाहती है
ये नीली स्याही वाली क़लम
आज कुछ...

कोशिश है पूरी की कुछ अच्छा लिखे
चाहे उसमें कितना भी वक़्त लगे
वो बेताब है....बेक़रार है
इस कोरे काग़ज़ को अपने रंग में रंगना चाहती है
ये नीली स्याही वाली क़लम
आज कुछ लिखना चाहती है

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