Tuesday, September 30, 2014

मकान

नींव में इसके हैं चंद अठन्नीयां
रोज़ दो मील चल के जो बचायी थीं

इस संगमरमर के फ़र्श को
जोडे हुए है वो नीली शर्ट का रफ़्फ़ू

और ये देखिये क्या आलिशां झूमर
उन कलाईयों की सादी कांच की चूडियों से रंगा है

और ये बैठक की दिवारों पर चढा हल्का गुलाबी रंग
मानो सुर्ख लाल में पसीने की कुछ बूंदे घुल गई हों

किसी ने बताया की आज ग्रह-प्रवेश है!
आज इस मकान को ज़िंदगी मिल रही है?
इस मकान को तो ज़िंदगी मिल चुकी है
ज़िंदगियां उन दोनो की....

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