Tuesday, February 17, 2015

देनवा

आज शाम बितायी देनवा के किनारे
दो प्याला चाय और चंद नमकीन बिस्कुट के साथ
पश्चिम में ढलता सूरज
भर गया सिन्दूरी मांग देनवा की
वो पंछीयों का झुंड और वो नाव लौट रहे हैं अपने घर
और इन पेडों के पीछे से आती रोशनी मे आस है एक नये दिन की
नये सूरज के साथ...पूर्वी के साथ
एक शाम और यहीं देनवा के किनारे...

No comments: