Sunday, January 03, 2016

चन्द और पैसे

आज जब बटवा खोला तो 'चन्द और पैसे' दिखे 
'चन्द और पैसे' 
ये वही चन्द और पैसे हैं जिनके लिए 
कभी थोड़े से हसीं लम्हे बेच दिये 
तो कभी एक उम्र ही बेच दी 
कभी अपनों का साथ बेच दिया 
तो कभी रिश्ते ही बेच दिये 
कभी थोड़ी सी तबीयत बेच दी 
तो कभी शक्सियत ही बेच दी 
 
इन चन्द और पैसों से शायद 
अपनी ज़िंदगी बेच...दूसरों की खरीद ली 

लग रहा है घाटे का सौदा कर लिया 
'चन्द और पैसों'के लिए 
जाने किसने मुझे ठग लिया? 

2 comments:

Best Efforts said...

बेहतरीन ।जिन्दगी यूं ही तमाम कर लेते हैं लोग , "चन्द ओर पैसों " पैसों के लिए ।"चन्द ओर पैसों "के लिए छीन न लेते हैं रौशनी ,बुझा कर गरीबों के दिये ।

Best Efforts said...

बेहतरीन ।जिन्दगी यूं ही तमाम कर लेते हैं लोग , "चन्द ओर पैसों " पैसों के लिए ।"चन्द ओर पैसों "के लिए छीन लेते हैं रौशनी ,बुझा कर गरीबों के दिये ।