Sunday, March 19, 2017

गुलज़ार

शब्द कुछ कम हैं मेरे पास
कुछ हिंदी के कम हैं
बहुत उर्दू के कम हैं
शब्द कुछ कम हैं  मेरे पास

मेरे ये बेज़ुबाँ जज़्बात बयां करूं कैसे?
दुनिया के अनोखे हालात कलम-बंद करूं कैसे?
इस नज़्म को मुकम्मल करूं कैसे?
इस ख़्याल को 'संपूर्ण' करूं कैसे?

शब्द कुछ कम हैं मेरे पास
कुछ लफ्ज़ तुम से ले लूँ?
तुम्हारी ग़ज़लों से, गीतों से, कहानी-कविताओं से
चंद अनमोल शब्द दे दो ना उधार
तुम...तुम तो हो अल्फ़ाज़-ए-'गुलज़ार'!

मैं

मैं
मैं हवा भी हूँ...बहने तो दो
मैं पानी भी हूँ...सींचने तो दो
मैं आग भी हूँ...तपने तो दो
मैं धरती भी हूँ...उगने तो दो
मैं आकाश भी हूँ...उड़ने तो दो

मैं...
स्त्री...पुरुष?
धर्म...जात?

मैं इन्सां भी हूँ...इन्सा गर समझो
मैं इन्सां भी हूँ...थोड़ा जीने तो दो!

Thursday, February 23, 2017

आसमां

मैने आसमां को चलते देखा है
सपनों को उड़ते देखा है
गमों को घुलते देखा है
खुशी को चमकते देखा है

तेरी गोद में सर रख कर लेटे हुए
मैने आसमां को चलते देखा है..