Sunday, March 19, 2017

गुलज़ार

शब्द कुछ कम हैं मेरे पास
कुछ हिंदी के कम हैं
बहुत उर्दू के कम हैं
शब्द कुछ कम हैं  मेरे पास

मेरे ये बेज़ुबाँ जज़्बात बयां करूं कैसे?
दुनिया के अनोखे हालात कलम-बंद करूं कैसे?
इस नज़्म को मुकम्मल करूं कैसे?
इस ख़्याल को 'संपूर्ण' करूं कैसे?

शब्द कुछ कम हैं मेरे पास
कुछ लफ्ज़ तुम से ले लूँ?
तुम्हारी ग़ज़लों से, गीतों से, कहानी-कविताओं से
चंद अनमोल शब्द दे दो ना उधार
तुम...तुम तो हो अल्फ़ाज़-ए-'गुलज़ार'!

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