Thursday, September 27, 2018

एलबम

नीले समंदर के बीच में
मोती से एक आईलैंड पर
लकड़ी के घर में
समंदर को देखती खिड़की के पास
एक बैंच पर तुम बैठी हो घुटनों को मोड़
शरारती आँखों से मुझे देखती
ऐसी एक तस्वीर है तुम्हारी

हरे खेतों से गुज़र के
पहाड़ के ऊपर
बादलों के पार
आसमां के पास
एक बर्फ की चादर बिछी है
पैर फिसलता है, तुम गिरती हो
और फिर खिलखिला के हँसती हो
ऐसी एक तस्वीर है तुम्हारी

कैमरे ने खींची नहीं
इसीलिए बयाँ कर रहा हूँ
तुम्हारी ऐसी तस्वीरों का
दिल में एक 'एलबम' बना रहा हूँ

1 comment:

Best Efforts said...

Awesome.